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सड़क दुर्घटना होने पर क्या करें: किसे कॉल करें, मुफ़्त इलाज
सड़क दुर्घटना के बाद 112 पर कॉल करें (नेशनल हाईवे पर आप 1033 पर भी कॉल कर सकते हैं)। जगह को सुरक्षित करें और घायलों को अस्पताल पहुँचाएँ। PM-RAHAT योजना के तहत हर सड़क दुर्घटना पीड़ित को किसी तय (designated) अस्पताल में 7 दिन तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। दुर्घटना में शामिल ड्राइवर को 24 घंटे के अंदर पुलिस को भी बताना होता है और बीमा कंपनी को जानकारी देनी होती है। मदद करने वाले व्यक्ति को कानून की सुरक्षा मिलती है, और उसे अपना नाम बताना ज़रूरी नहीं है।
- इमरजेंसी
- 112 (किसी भी फ़ोन से, मुफ़्त)
- हाईवे
- 1033 (NHAI हेल्पलाइन)
- मुफ़्त इलाज
- ₹1.5 लाख तक, 7 दिन
- पुलिस रिपोर्ट
- 24 घंटे के अंदर
- मदद करने वाले का इनाम
- ₹25,000 (Rah-Veer)
इस पेज पर
सड़क दुर्घटना के तुरंत बाद आपको क्या करना चाहिए?
आपइमरजेंसी सेवाएँ, अस्पताल, पुलिससमय सीमा
- रुकें। हैज़र्ड लाइट चालू करें, वाहन के पीछे चेतावनी त्रिकोण रखें, और ट्रैफ़िक से दूर हट जाएँ
- 112 पर कॉल करें (या नेशनल हाईवे पर 1033) और सही जगह बताएँ
- क्या कोई घायल है?नहीं: पुलिस को रिपोर्ट करें और अपनी बीमा कंपनी को बताएँ
- एम्बुलेंस या मदद करने वाले लोग घायलों को सबसे पास के तय अस्पताल ले जाते हैं
- अस्पताल पीड़ित का कैशलेस इलाज करता है, 7 दिन तक ₹1.5 लाख तक
- दुर्घटना में शामिल ड्राइवर: 24 घंटे के अंदर पुलिस को रिपोर्ट करें और बीमा कंपनी को बताएँ
112 ऑपरेटर को क्या बताएँ
- आप कहाँ हैं: सड़क या हाईवे का नंबर, सबसे पास का किलोमीटर पत्थर या कोई पहचान की जगह, और आप किस दिशा में जा रहे थे। अगर कहा जाए तो अपनी लाइव लोकेशन शेयर करें।
- कितने लोग घायल हैं, और क्या वे होश में हैं, साँस ले रहे हैं या उनका बहुत खून बह रहा है।
- क्या कोई फँसा हुआ है, या आग लगी है या ईंधन लीक हो रहा है।
- कितने वाहन शामिल हैं।
- सबसे पास का वह अस्पताल पूछें जो दुर्घटना पीड़ितों को कैशलेस इलाज देता है।
यह चेकलिस्ट हमारी अपनी गाइड है, कोई सरकारी स्क्रिप्ट नहीं। स्मार्टफ़ोन पर आप पावर बटन को जल्दी-जल्दी तीन बार दबाकर 112 को SOS भी भेज सकते हैं, या 112 India ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं।
आपकी भूमिका में आपको क्या करना है?
अगर आप दुर्घटना में शामिल वाहन चला रहे थे
- रुकें। अगर पुलिस अधिकारी कहे तो उचित समय तक रुकें, और प्रभावित व्यक्ति के पूछने पर अपना और वाहन मालिक का नाम और पता बताएँ (धारा 132)।
- हर घायल को इलाज दिलाएँ, जिसमें उसे सबसे पास के डॉक्टर या अस्पताल ले जाना भी शामिल है। कानून आपको छूट सिर्फ़ तब देता है जब ऐसा करना संभव न हो, जैसे गुस्साई भीड़ की वजह से (धारा 134)।
- पुलिस को रिपोर्ट करें। पुलिस जो जानकारी माँगे, वह दें। अगर वहाँ कोई अधिकारी नहीं था, तो जितनी जल्दी हो सके और 24 घंटे के अंदर सबसे पास के पुलिस थाने में रिपोर्ट करें।
- बीमा कंपनी को लिखित में बताएँ: पॉलिसी नंबर और उसकी वैधता, तारीख, समय और जगह, घायल या मृत लोग, और ड्राइवर का नाम और लाइसेंस।
अगर आप मदद के लिए रुके
- पहले पक्का करें कि आप सुरक्षित हैं, फिर 112 पर कॉल करें।
- जितनी मदद कर सकें, करें। अगर सुरक्षित हो, तो आप घायल व्यक्ति को सबसे पास के अस्पताल ले जा सकते हैं।
- आपको पुलिस या अस्पताल को अपना नाम, पता या फ़ोन नंबर देना ज़रूरी नहीं है।
- मरीज़ के भर्ती होने के बाद आप जा सकते हैं। अस्पताल से एक पर्ची माँग लें कि पीड़ित को आप लाए थे: Rah-Veer इनाम के लिए इसकी ज़रूरत होती है।
- अस्पताल आपसे पैसे नहीं माँग सकता। गवाह बनना आपकी मर्ज़ी है।
अगर आप या परिवार का कोई सदस्य घायल हुआ
- कैशलेस इलाज के लिए सबसे पास का तय अस्पताल (designated hospital) पूछें (112 ऑपरेटर बता सकता है)।
- दुर्घटना के बाद पहले 7 दिन ₹1.5 लाख तक के इलाज का पैसा आपको नहीं देना होता।
- FIR नंबर, अस्पताल के रिकॉर्ड और सीमा से ज़्यादा के सभी बिल संभालकर रखें। बाद में पुलिस पीड़ितों को एक फ़ॉर्म देती है जिसमें उनके अधिकार बताए होते हैं।
- आप मुआवज़े का क्लेम कर सकते हैं: नीचे मुआवज़ा देखें।
PM-RAHAT के तहत मुफ़्त इलाज कैसे मिलता है?
PM-RAHAT योजना (पहले का नाम: सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस इलाज योजना, 2025) मोटर वाहन से जुड़ी सड़क दुर्घटना के हर पीड़ित को कैशलेस इलाज देती है, चाहे सड़क किसी भी श्रेणी की हो।
| क्या | नियम |
|---|---|
| रकम | हर पीड़ित के लिए ₹1.5 लाख तक |
| अवधि | दुर्घटना की तारीख से शुरू होने वाले पहले 7 दिन |
| कहाँ | तय अस्पताल: आयुष्मान भारत PM-JAY के वे अस्पताल जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) के दिशा-निर्देश मानते हैं, और वे अस्पताल जिन्हें राज्य जोड़े |
| हालत स्थिर करना | 24 घंटे तक, या जान का खतरा हो तो 48 घंटे तक, जब तक पुलिस ऑनलाइन दुर्घटना की पुष्टि करती है |
| अस्पताल को पैसा कौन देता है | मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund) (बीमा कंपनियाँ, या बिना बीमा वाले और हिट-एंड-रन वाहनों के लिए सरकार) |
₹1.5 लाख से ज़्यादा का खर्च, या 7वें दिन के बाद का खर्च, इस योजना में शामिल नहीं है। इसके लिए स्वास्थ्य बीमा, या अगर आप पात्र हैं तो आयुष्मान भारत का इस्तेमाल करें, या इसे मुआवज़े में क्लेम करें।
इलाज से मना किया या जमा राशि (डिपॉज़िट) माँगी? अस्पताल को बताएँ कि यह PM-RAHAT के तहत सड़क दुर्घटना का मामला है। अगर फिर भी बात न बने, तो ज़िले के शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer) से शिकायत करें (जिसे ज़िला सड़क सुरक्षा समिति नियुक्त करती है), फिर ज़िला कलेक्टर से, फिर राज्य सड़क सुरक्षा परिषद से।
मदद करने वाले व्यक्ति (Good Samaritan) के क्या अधिकार हैं?
- मदद करने पर कोई कानूनी खतरा नहीं: अगर नेक इरादे से मदद करते समय उसकी लापरवाही से पीड़ित को नुकसान हो जाए, तो भी Good Samaritan पर कोई सिविल या आपराधिक कार्रवाई नहीं होती (धारा 134A)।
- जानकारी देने की मजबूरी नहीं: कोई पुलिस अधिकारी या कोई और आपको अपना नाम, पता या दूसरी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता (Good Samaritan नियम, 2020)।
- गवाह सिर्फ़ अपनी मर्ज़ी से। अगर आप राज़ी हों, तो आपसे सिर्फ़ एक बार पूछताछ होगी, आपकी सुविधा के समय और जगह पर।
- कोई पैसा नहीं: अस्पताल आपसे पैसे नहीं माँग सकते, और उन्हें Good Samaritan के अधिकारों का चार्टर लगाना होता है।
- Rah-Veer इनाम: "गोल्डन आवर" में पीड़ित को इलाज दिलाने में मदद के लिए ₹25,000 और एक सर्टिफिकेट, साल में पाँच बार तक।
बाद में पुलिस और बीमा कंपनी के साथ क्या होता है?
- पुलिस मामला दर्ज करती है। जाँच अधिकारी 48 घंटे के अंदर क्लेम ट्रिब्यूनल को पहली दुर्घटना रिपोर्ट (First Accident Report) भेजता है।
- हर वाहन के ड्राइवर और मालिक को फ़ॉर्म मिलते हैं, जिन्हें भरकर जाँच अधिकारी को लौटाना होता है।
- बाद में पुलिस क्लेम ट्रिब्यूनल में विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (Detailed Accident Report) दाखिल करती है (90 दिन के अंदर)। ट्रिब्यूनल इसे मुआवज़े का क्लेम मान सकता है।
- आपके अपने वाहन के नुकसान के लिए बीमा कंपनी एक सर्वेयर नियुक्त करती है। दूसरे लोगों के आपके खिलाफ़ क्लेम (थर्ड-पार्टी क्लेम) आपकी बीमा कंपनी ट्रिब्यूनल के ज़रिए संभालती है।
घटना की जगह और वाहनों की फ़ोटो, दूसरे वाहन का नंबर, गवाहों के संपर्क (सिर्फ़ उनकी सहमति से), और FIR या रिपोर्ट नंबर संभालकर रखें।
पीड़ित कितना मुआवज़ा क्लेम कर सकते हैं?
वाहन का पता है
- जहाँ दुर्घटना हुई या जहाँ आप रहते हैं, वहाँ के मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunal) में क्लेम करें।
- बिना गलती साबित किए मुआवज़ा (No-fault compensation) (आपको यह साबित नहीं करना कि ड्राइवर की गलती थी): मौत होने पर ₹5 लाख, गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख (धारा 164)।
- अधिनियम में क्लेम दाखिल करने की सीमा छह महीने है (धारा 166(3))। इस सीमा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है (Bhagirathi Dash v. Union of India), और कोर्ट ने कहा है कि यह लंबित मामला ट्रिब्यूनलों को क्लेम पर फ़ैसला करने से नहीं रोकता। जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत पीड़ित पर्याप्त कारण दिखाकर समय सीमा के बाद 12 महीने तक ट्रिब्यूनल जा सकते हैं; क्लेम दाखिल करने की तारीख पर जाँच लें कि यह हिस्सा लागू हुआ है या नहीं। कानूनी सलाह लें और जितनी जल्दी हो सके क्लेम दाखिल करें।
वाहन भाग गया और उसका पता नहीं चला
- हिट-एंड-रन मुआवज़ा योजना (2022) के तहत मौत होने पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000।
- पहले FIR दर्ज कराएँ। फिर क्लेम जाँच अधिकारी (Claims Enquiry Officer) (जहाँ दुर्घटना हुई उस इलाके के SDM या तहसीलदार) को आवेदन करें, साथ में FIR, मेडिकल या पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पहचान पत्र और बैंक की जानकारी दें।
- PM-RAHAT के तहत कैशलेस इलाज फिर भी मिलता है।
- अगर बाद में वाहन का पता चल जाए और आपको ट्रिब्यूनल से मुआवज़ा मिले, तो हिट-एंड-रन की रकम लौटानी होती है।
क्या गड़बड़ हो सकती है, और उसे कैसे ठीक करें?
| आपकी स्थिति | आम तौर पर इसका मतलब | क्या करें |
|---|---|---|
| अस्पताल डिपॉज़िट माँग रहा है | स्टाफ़ को जानकारी नहीं है, या यह तय अस्पताल नहीं है | बताएँ कि यह PM-RAHAT के तहत सड़क दुर्घटना का मामला है। जो अस्पताल तय सूची में नहीं है, उसे भी मरीज़ की हालत स्थिर करके उसे ट्रांसफ़र करना चाहिए। ज़िले के शिकायत निवारण अधिकारी से शिकायत करें। |
| पुलिस मदद करने वाले को रुकने या जानकारी देने को कह रही है | Good Samaritan नियमों का पालन नहीं हो रहा | मदद करने वाला विनम्रता से मना कर सकता है और मरीज़ के भर्ती होने के बाद जा सकता है। |
| कैशलेस इलाज रुक गया: पुलिस ने पुष्टि नहीं की | पुलिस ने समय पर ऑनलाइन दुर्घटना की पुष्टि नहीं की | अस्पताल और पुलिस थाने से पुष्टि पूरी करने को कहें; फिर शिकायत निवारण अधिकारी से शिकायत करें। |
| ₹1.5 लाख से ज़्यादा या 7वें दिन के बाद के बिल | योजना की सीमा | स्वास्थ्य बीमा या आयुष्मान भारत का इस्तेमाल करें, और ये खर्च मुआवज़े के क्लेम में शामिल करें। |
| भीड़ ड्राइवर को धमका रही है | भीड़ की हिंसा का खतरा | सुरक्षित जगह पर जाएँ, 112 पर कॉल करें, और 24 घंटे के अंदर सबसे पास के पुलिस थाने में रिपोर्ट करें। |
| ड्राइवर अस्पताल में था और 24 घंटे में रिपोर्ट नहीं कर पाया | समय पर रिपोर्ट करना संभव नहीं था | जितनी जल्दी हो सके रिपोर्ट करें और कारण बताएँ। |
| बीमा कंपनी सर्वे या क्लेम में देरी कर रही है | क्लेम धीमा चल रहा है | बीमा कंपनी के शिकायत अधिकारी को लिखें; अगर हल न हो, तो बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास जाएँ। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दुर्घटना के बाद मैं किस नंबर पर कॉल करूँ?
भारत में कहीं भी 112। नेशनल हाईवे पर आप 1033 पर भी कॉल कर सकते हैं। कई राज्यों में 108 एम्बुलेंस सेवा चलती है।
क्या मुझे अस्पताल में पैसे देने होंगे?
PM-RAHAT के तहत तय अस्पताल में पहले 7 दिन हर पीड़ित के लिए ₹1.5 लाख तक नहीं।
क्या इसमें स्टेट हाईवे और गाँव की सड़कें भी शामिल हैं?
हाँ। PM-RAHAT किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना को कवर करता है।
अगर मैं किसी को अस्पताल ले जाऊँ, तो क्या पुलिस मुझे परेशान करेगी?
आपको अपना नाम या पता बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, और गवाह बनना आपकी मर्ज़ी है। नेक इरादे से मदद करने पर कानून आपको कानूनी कार्रवाई से बचाता है।
Rah-Veer इनाम कितना है?
₹25,000 और एक सर्टिफिकेट, साल में पाँच बार तक।
ड्राइवर को कितनी जल्दी पुलिस को बताना होता है?
जितनी जल्दी हो सके, और अगर मौके पर कोई पुलिस अधिकारी नहीं था तो 24 घंटे के अंदर।
हमें टक्कर मारने वाला वाहन भाग गया। हम क्या क्लेम कर सकते हैं?
FIR दर्ज कराएँ, फिर हिट-एंड-रन योजना के तहत SDM या तहसीलदार को आवेदन करें: मौत होने पर ₹2 लाख, गंभीर चोट पर ₹50,000।
मुआवज़े का क्लेम करने के लिए कितना समय मिलता है?
अधिनियम में छह महीने लिखा है। इस सीमा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, और जन विश्वास अधिनियम 2026 पर्याप्त कारण होने पर 12 महीने तक ज़्यादा समय देता है। कानूनी सलाह लें और जितनी जल्दी हो सके क्लेम दाखिल करें।
क्या हिट-एंड-रन के लिए 10 साल की जेल वाला प्रावधान लागू है?
नहीं। जब भारतीय न्याय संहिता लागू हुई, तो धारा 106(2) को छोड़ दिया गया, और हमें इसे बाद में लागू करने वाली कोई अधिसूचना नहीं मिली।
स्रोत
- आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (Emergency Response Support System) – 112 (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- PIB – PM-RAHAT की शुरुआत (14 फ़रवरी 2026) और PIB – PM-RAHAT कैशलेस इलाज (2026) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- गज़ट S.O. 952(E), 19 फ़रवरी 2026: नया नाम PM-RAHAT (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- PIB – NHAI हेल्पलाइन 1033 (27 मई 2026) और PIB – 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाएँ (6 जून 2026) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- PIB – Good Samaritan नियम (1 अक्टूबर 2020) और PIB – Rah-Veer इनाम (4 जनवरी 2026) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 – गज़ट पाठ (परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़): धारा 134A, 161, 164, 166 (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- India Code – मोटर वाहन अधिनियम, 1988: धारा 132 और 134 (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- PIB – हिट-एंड-रन मुआवज़ा योजना (2022) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- PIB – दुर्घटना रिपोर्ट और क्लेम की प्रक्रिया (मार्च 2022) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- स्वास्थ्य मंत्रालय – मानक इलाज दिशा-निर्देश: गंभीर चोट (Major Trauma) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- भारत का सुप्रीम कोर्ट – Bhagirathi Dash v. Union of India, W.P.(C) 166/2024, 16 दिसंबर 2025 का आदेश (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- PIB – जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026: मुआवज़े के क्लेम के लिए ज़्यादा समय (4 अप्रैल 2026) और आकाशवाणी (All India Radio) – संसद ने विधेयक पास किया (2 अप्रैल 2026) (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
- गृह मंत्रालय – नए आपराधिक कानूनों पर लोकसभा में जवाब (3 दिसंबर 2024): धारा 106(2) बाहर रखी गई (25 अक्टूबर 2026 को देखा गया)
पेज का इतिहास: 25 अक्टूबर 2026: पहली बार प्रकाशित। 25 अक्टूबर 2026: स्रोत केवल सरकारी वेबसाइटों तक सीमित किए गए।